कसक

दिल में कसक जगी है
तू मेरे पास नहीं है
मुझे समय वो याद आता
जो तेरे संग बिताया
वो हँसना और खिलखिलाना
कभी रूठना , मनाना
तू है ‘अनुज’ मेरा
ठंडी छांव का बसेरा
जाने ये कौन आया
छिना मुझसे मेरा साया

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आँखे देखे इक सपना

आँखे देखे इक सपना
कुछ अपना कुछ अनजाना
दिल भी है धडके
गाते हुए नया तराना
सांसे मेरी महके
… देख तुझे दीवाना
सजदे में सर झुकता
जब सामने तू आ जाता
ममता