यादों के पन्ने….

यादों के पन्ने कुछ ऐसे बिखरे
आँखों से पल-पल आंसू है झरते
वो खुशियाँ जो मिल ना पायी
क्यों उनका अहसास दिलाते
पर मैंने वो पन्ने चुन डाले
जो हरदम मुस्कान है लाते
जीवन का हर क्षण जीना है
यादों को बस दिल में संजोना है
अपने फर्ज निभाना है….
बस आगे बढ़ते जाना है…..

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एक आस…

एक इच्छा
तुझसे मिलने की…
एक सपना
तुझे देखने की…
एक आवाज
तेरी सुननी थी…
एक बात
तुम्हे कहनी थी…
एक दर्द
तेरा लेना था…
एक मुस्कान
तुम्हे देनी थी…
एक रिश्ता
कहीं खो गया है…
एक आस
खोये को पाने की….

बसंत सा लगता है…

खिलखिलाती धुप में जीवन झिलमिलाता है
फूलो को भंवरा जैसे दिल का हाल सुनाता है
दूर कहीं क्षितिज से सूरज भी धरती से मिलने आता है
तारों के संग चंदा भी प्रेम का रास रचाता है
नदियाँ को भी देखो सागर मीठा-मीठा सा लगता है
ऐसे ही तेरी एक नजर से मुझको
पतझड़ भी बसंत सा लगता है
बसंत सा लगता है……

जाने कैसे..

कभी वादे सबां कुछ कहती सी लगती है
कभी फिजां महकी सी लगती है
कभी दूर कहीं शहनाई सी बजती है
कभी साँसों की सरगम सजती है
कभी पायल की रुनझुन हंसती है
कभी चूड़ी की खान-खान खिलती है
जाने कैसे सबको खबर हो जाती है
जब तेरे कदमो की नजदीकी बढती है
जाने कैसे…..

ऐ रात… !!!

ऐ रात !!!
तू धीरे धीरे चल
अभी चंदा
तारों संग बतिया करता है
कुछ उनकी सुनता है
… कुछ अपनी कहता है
दूर कहीं कोई
बंद पलकों में सपने बुनता है
जो मिला ना
दिन के उजियारे में
सपनों में संग संग चलता है
ऐ रात !!!
तुझे पता है….
कोई तेरे लिए तडफता है
जब तेरे आँचल का इक तारा बनकर
वो मुझसे मिलने आता है
ऐ रात….!!!!
धीरे धीरे चल…….