ज़िन्दगी…..

ज़िन्दगी मुझे तो सुरमई शाम सी लगती है,
होती हूँ जब भी अकेली तारों की छाँव सी लगती है,
चंदा के रथ पर आती है जैसे कोई परी,
मुझको तो ऐसे कोई सलोना ख्वाब सी लगती है…..

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मुहोब्बत को पुल
बनाया है मैंने…!
अपने और तेरे दरमियाँ….!!

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तेरी आँखों में देखा जब से खुद को,
आइने की जरूरत नही अब मुझको….!!

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रफ्ता रफ्ता
वह मुझमे यूँ समाया
भूली अब मै
अपना ही पता….!!

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काश……

माटी कहे कुम्हार से,
देना मुझको वो रूप,
जो खुशियाँ बन खिल जाये,
उसके जीवन में,जो मुझे है अनमोल…..

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मैंने जुटाया है अपनी मौत का सामान,
खुद अपने हाथो से….
बस इंतजार अब उसके काँधे का है……!!

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आँखों ने ख्वाब देखा , बस उसके साथ का,
दिल तड़फ क्र रोया , जब वो पटल गया…!!

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अकेला छोड़ता है ना साथ चलता है…
वो शख्स जाने मुझसे क्या चाहता है…

सुनो..!!

सुनो..!!
मुझे जिंदगी दोगे…?
अपनी बांहों में पनाह दोगे….??

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सुनो..!!
जन्नत का मुझे ,
पता मिल गया है…!
अपनी पनाहों में,
जबसे तुने ले लिया है…!!
अब कोई गम,
मुझे सताता नही है…!!!
तेरे साथ का,
जब से सहारा मिल गया है…!!!!

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सुनो..!!
एक तुमसे दुरी…!
जिंदगी बनी है सजा मेरी…!!

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सुनो ..!!
तुमसे मेरा रिश्ता,
अब सब पूछते है…

क्या मै ?
जिंदगी को साँसों का पता बता दूँ….!!

सुनो..!!

सुनो..!!
अपनी जिंदगी में ,
मेरा पता बताकर…..

क्या मुझे ??
कुछ साँसे उधार दोगे…..:!!

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सुनो..!!
जरा अपने..
दिल पर हाथ रख लो…!!
फिर,
मेरी आँखों में देख कर
मुझे,
मेरा पता बता दो…!!!!

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सुनो..!!
मुझसे, नजरे चुरा रहे हो…
क्या खुद को छिपा रहे हो…
बस गयी हूँ तुम्हारी रूह में….
क्या ??
ये इकरार करते डर रहे हो…!!